तुम भी चलकर काँधा दे दो अब ये ख़ुशी की बात नहीं
जाती है बीमार की मय्यत शादी की बारात नहीं
गायिका: मुन्नी बेगम
जीवन के ऐसे क्षण जो स्व (ख़ुद) से निकलकर विस्तार में जाने को विवश कर देते हैं उन्हीं क्षणों की अभिव्यक्ति का आयोजन
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