समय-सृजन की नई कड़ी स्वर-सृजन का लक्ष्य आवाज़ के माध्यम से साहित्य और गीत-संगीत की प्रस्तुति है।

समय-सृजन की नई कड़ी स्वर-सृजन

समय सृजन की नई कड़ी स्वर सृजन में आप का स्वागत है। इंटरनेट असल में एक संपूर्ण माध्यम है। इसका दखल प्रिंट के समानान्तर ही श्रव्य और दृष्य (आडियो और वीडियो) के क्षेत्र में बराबर का है। हालांकि इंटरनेट पर इसका क्षेत्र-विस्तार आश्चर्यजनक है, लेकिन साहित्य की दृष्टि से अभी वह स्थिति नहीं है जो अपेक्षित है। इस चिट्ठे के ज़रिये मेरा प्रयास यही होगा कि साहित्य की विभिन्न विधाओं और गीत संगीत की गंभीर और कुछ साहित्यक प्रस्तुतियों से आप सब को आडियो और वीडियो के माध्यम से रू-बरू करवाया जाए!

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Waqar's Blog
यदि कोई कड़ी काम ना कर रही हो तो कृपया टिपण्णी द्वारा अवगत कराएँ, धन्यवाद!

शनिवार, २१ नवम्बर २००९

तुम भी चलकर काँधा दे दो…मुन्नी बेगम

तुम भी चलकर काँधा दे दो अब ये ख़ुशी की बात नहीं
जाती है बीमार की मय्यत शादी की बारात नहीं
गायिका: मुन्नी बेगम

गुरुवार, १९ नवम्बर २००९

हमसे वो दूर दूर रहते हैं...मुन्नी बेगम

हमसे वो दूर दूर रहते हैं
दिल मे लेकिन ज़रूर रहते हैं
गायिका: मुन्नी बेगम

मंगलवार, १७ नवम्बर २००९

शब को मेरा जनाज़ा जायेगा यूँ निकलकर…मुन्नी बेगम

शब को मेरा जनाज़ा जायेगा यूँ निकलकर
रह जायेंगे सहर तक दुश्मन भी हाथ मलकर
गायिका: मुन्नी बेगम

रविवार, १५ नवम्बर २००९

पसीने पसीने हुए जा रहे हो…मुन्नी बेगम

पसीने पसीने हुए जा रहे हो
ये बोलो कहाँ से चले आ रहे हो
गायिका: मुन्नी बेगम

शुक्रवार, १३ नवम्बर २००९

मुझे फूल सब्र करने…मुन्नी बेगम

मुझे फूल सब्र करने मुझे बाग़बाँ भुला्दे
के क़फ़स में तंग आकर मेरे और हैं इरादे

गायिका: मुन्नी बेगम

बुधवार, ११ नवम्बर २००९

मरने वाला है बीमार हसरत…मुन्नी बेगम

मरने वाला है बीमार हसरत
अब कहा मान जा हुस्न वाले

गायिका: मुन्नी बेगम

सोमवार, ९ नवम्बर २००९

कुछ ऐसे मुक़ामे मुहब्बत भी आये…मुन्नी बेगम

कुछ ऐसे मुक़ामे मुहब्बत भी आये
जो आहों को रोका तो आँसू भर आये

गायिका: मुन्नी बेगम

शनिवार, ७ नवम्बर २००९

इधर ज़िन्दगी का जनाज़ा उठेगा…मुन्नी बेगम

इधर ज़िन्दगी का जनाज़ा उठेगा
उधर ज़िन्दगी उनकी दुलहन बनेगी

गायिका: मुन्नी बेगम

गुरुवार, ५ नवम्बर २००९

मौसम है आशिकाना…पाकीज़ा का गीत

मौसम है आशिकाना……………………………।
ऐ दिल कहीं से उनको ऐसे में ढूँढ में लाना

फिल्म:पाकीज़ा

बुधवार, ४ नवम्बर २००९

इन्हीं लोगों ने इन्हीं लोगों ने ले लीना डुपटटा मेरा… पाकीज़ा का गीत

इन्हीं लोगों ने इन्हीं लोगों ने ले लीना डुपटटा मेरा
हमरी ना मानों बजजवा से पूँछो सैय्याँ………………

फिल्म:पाकीज़ा
 
डिज़ाइन:वक़ार अहमद @ समय-सृजन/स्वर-सृजन